सुविधा शुल्क लेकर सुविधा देने की परंपरा के खिलाफ हूंः अरविंद पांडेय

अफसरों की गलत नीतियों के चलते सरकार होती है बदनाम

न्यूज एंड नाॅक ब्यूरो, रूद्रपुर। जमीनी विवादों के आरोपों से घिरे गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय ने लंबे समय से जमीनों की रजिस्ट्री बंद होने का मुद्दा डीएम के सामने उठाया। डीएम ने 18 फरवरी तक सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया। इधर, विधायक ने कहा कि जमीनों की रजिस्ट्री बंद करने से कोई बदलाव नहीं दिखा, अलबत्ता मन में शंका जरूर पैदा हो गई।

बृहस्पतिवार को डीएम से कैप आॅफिस में मुलाकात के बाद विधायक पांडेय कहा कि जो जमीन का मालिक है वो किसी ने किसी माध्यम से जब तक पैसा नहीं देगा तब तक रजिस्ट्री नहीं खुलेगी। यह तकलीफ की बात है। इससे हमारी सरकार बदनाम होती है, अधिकारियों का क्या जाता है। डीएम, एसएसपी, एडीएम, एसडीएम हो, चाहे कोई भी हों, इनकी गलत नीतियों की वजह से हमारी सरकार बदनाम क्यों हो। हम जनता के नौकर हैं। लोग अपने बच्चों को अच्छी सुविधा देने के लिए पहाड़ से पलायन कर नीचे आते हैं। वे प्लाट लेने जाएंगे तो बोझ सुविधा शुल्क का बोझ उन पर पडेगा। इस मामले को लेकर मन विचलित था।

प्रापर्टी डीलर ने उधार लेकर जमीन खरीद ली और रजिस्ट्री बंद हो गई। आत्महत्या की नौबत क्यों आती है जब कारोबार बंद हो जाता है। नियम लागू होने चाहिए। सुविधा शुल्क लेकर सुविधा देने की परंपरा के खिलाफ हूं। एक साल से लोग परेशान हैं। डीएम नितिन भदौरिया से बात की। डीएम ने कहा कि 18 तारीख को जहां प्रतिबंध लगाया है। अधिकारी और प्रापर्टी डीलर को बैठक बुलाएंगे और रजिस्ट्री खोल देंगे। अब सुनने में आता है कि कई जगह बाजपुर, गदरपुर में रजिस्ट्री खुल गई है। कोई बदलाव नहीं आया है। किस मकसद से रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया और किस मकसद से खोल दिया। कहीं न कहीं मन में संशय पैदा होता है। डीएम से बात हुई है। बहुत जल्द ही जिले में रजिस्ट्री से रोक हट जाएगी। हमारी सरकार ईमानदारी से काम कर रही है। किसी अधिकारी की लापरवाही के चलते कोई लोग आत्महत्याएं करें, ऐसा किसी कीमत पर नहीं होने देंगे। जनता के साथ हमेशा साथ हैं। जनता की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।

 

हम आरोपों से भागते नहीं और न कुछ छिपाते हैं

विधायक पांडेय ने जनजाति की जमीन को गलत ढंग से बेटे के नाम करवाने के कांग्रेस नेता सुमित्तर भुल्लर के आरोप पर तंज कसा। कहा कि होली का त्यौहार आता है तो लोग कहते हैं कि बुरा न मानो होली है। वैसे ही चुनाव आ गया। बुरा न मानो चुनाव है। उन्होंने आरोप लगाने वालों को नसीहत दी। कहा कि हमने बडा अपराध किया होगा, इनको कानून में जाना चाहिए। हम पर आरोप लगता है तो मैं कहता हूं सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आरोप लगाने वाले कानून का सहारा लें। समय आने पर सब आरोपों का पता चलेगा। हम आरोपों से भागते नहीं है और न कोई चीज छिपाते हैं।  

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