– 80 साल की थी उम्र में की अंतिम सांस, बाघ रेस्क्यू अभियानों में निभाई थी अहम भूमिका
– कॉर्बेट प्रशासन ने राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो
रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की बुजुर्ग हथिनी सोनाकली अब नहीं रही। करीब 80 वर्ष की उम्र में 17 अक्टूबर की रात 10:45 बजे उसने अंतिम सांस ली। उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही सोनाकली ने अपने लंबे सेवाकाल में बाघों के रेस्क्यू से लेकर मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों तक वन विभाग का साथ दिया। 18 अक्टूबर को अधिकारियों और कर्मचारियों ने उसे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
जानकारी के अनुसार, सोनाकली वर्ष 1997 में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पहुंची थी। करीब दो दशकों तक उसने वन विभाग के साथ वन्यजीव संरक्षण और बाघ रेस्क्यू अभियानों में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2011 में गर्जिया क्षेत्र में आदमखोर बाघ को पकड़ने के अभियान में सोनाकली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब वन कर्मियों ने बाघ को पकड़ने का घेरा बनाया था तो बाघ आक्रामक हो गया था। हथिनी की मदद से बाघ को पकड़ा जा सका था।
वर्ष 2012 में सर्पदुली रेंज में बाघ के हमले में जान गंवाने वाले दीवानी राम के शव को बाघ के मुंह से निकालने के अभियान में भी उसने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। वर्ष 2023 में सर्पदुली क्षेत्र में बाघ रेस्क्यू अभियान में भी उसका योगदान रहा था।
कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार, जंगल में गश्त और अन्य अभियानों के दौरान सोनाकली ने कई मौकों पर वन विभाग के कर्मियों और चारा काटने वाले श्रमिकों की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभाई। कॉर्बेट में वर्षों तक सेवाएं देने के बाद सोनाकली को 23 जनवरी 2018 को विधिवत सेवानिवृत्त कर दिया गया था। इसके बाद भी उसकी देखभाल और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाता रहा। उम्र संबंधी बीमारियों के चलते 17 अक्टूबर की रात उसका निधन हो गया।
कॉर्बेट की विरासत का हिस्सा रहेगी सोनाकली
वन्यजीव संरक्षण में प्रशिक्षित हाथियों की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। दुर्गम जंगलों में बाघ रेस्क्यू जैसे चुनौतीपूर्ण अभियानों के दौरान उनकी मौजूदगी वन विभाग के लिए उपयोगी साबित होती रही है। सोनाकली इसी विरासत की अहम कड़ी थी। उसके निधन से कॉर्बेट के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास का एक यादगार अध्याय समाप्त हो गया। बाघ रेस्क्यू अभियानों में उसका योगदान और जंगल में निभाई गई जिम्मेदारियां लंबे समय तक याद की जाएंगी।




