हरिद्वार के निजी अस्पताल को महिला डॉक्टरों का वेतन रोकने पर कड़ा नोटिस, 16 मार्च को पेशी

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महिला आयोग ने सुनवाई के दौरान की कार्रवाई

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो, हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने हरिद्वार में ‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के तहत जनसुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया। जिलाधिकारी सभागार में आयोजित जनसुनवाई में एक निजी अस्पताल (मेट्रो हॉस्पिटल) द्वारा दो महिला चिकित्सकों का करीब पौने दो साल का वेतन रोकने के मामले में अध्यक्ष ने प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई और एक हफ्ते के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए।

बुधवार को जनसुनवाई के दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, महिला आयोग के निर्देशों पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर न्याय दिखना चाहिए।

उन्होंने पुलिस और अन्य विभागों को आयोग द्वारा भेजे गए पत्रों पर समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। मेट्रो हॉस्पिटल हरिद्वार को 16 मार्च को आयोग में व्यक्तिगत रूप से पेश होने और महिला डॉक्टरों का बकाया वेतन एक सप्ताह में चेक के माध्यम से देने का आदेश दिया।

उन्होंने जेठ द्वारा विधवा महिला की संपत्ति हड़पने के मामले में जिलाधिकारी को पीड़िता को कब्जा दिलाने के निर्देश दिए।

वहीं, पति के अतिरिक्त संबंधों और दहेज उत्पीड़न के मामले में जांच शुरू की। इसके साथ ही मनसा देवी मार्ग से हटाई गई निर्धन महिलाओं को नगर निगम द्वारा उचित स्थान पर दुकान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। एक पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क वकील उपलब्ध कराया गया। सभी विभागों को कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित (POSH) कार्यशालाएं आयोजित करने को कहा गया।

वहां पर मुख्य विकास अधिकारी एलएन मिश्रा, एसपी क्राइम निशा यादव, आयोग की सदस्य सचिव उर्वशी चौहान सहित जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे


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