2027 के नौजवानों के भविष्य के लिए दधीचि की तरह अपनी हड्डियाँ तक देने को तैयार: हरदा

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समर्थकों से मांगी माफी, फेसबुक पोस्ट ने फिर मचाई हलचल

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो,  देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने हालिया ‘अवकाश’ और राजनीति से दूरी की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए एक भावुक और रणनीतिक संदेश जारी किया है। रावत ने फेसबुक पोस्ट से स्पष्ट किया कि 59 वर्षों की अटूट राजनीतिक यात्रा के बाद एक छोटा सा अवकाश लेना उनका ‘स्वाभाविक अधिकार’ है, लेकिन इस दौरान भी वे जनसेवा के लिए निरंतर सक्रिय हैं।

उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि उन्होंने पिछले छह दशकों में हमेशा खुद को एक कार्यकर्ता माना है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार उन्होंने नेतृत्व से विनती जरूर की, लेकिन अंततः हाईकमान के फैसले को ही सर्वोपरि रखा।59 वर्षों का यह व्रत अब संकल्प बन चुका है, जो न टूटेगा और न बदलेगा।

कुंजवाल के बयान और समर्थकों से माफी

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल द्वारा रावत के पक्ष में दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कुंजवाल जी के साथ उनका गहरा भावनात्मक संबंध है। उन्होंने उन समर्थकों से भी माफी मांगी जो उन्हें भाई या पिता समान मानते हैं और उनके अवकाश से विचलित हैं। उन्होंने अपील की कि उनके इस ब्रेक को ‘पक्ष-विपक्ष’ का मुद्दा न बनाया जाए।

2027 के लिए ‘दधीचि’ वाला संकल्प

सबसे महत्वपूर्ण संदेश उन्होंने उन युवा नेताओं के लिए दिया जो 2027 के चुनावों में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। रावत ने कहा वे युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। यदि जरूरत पड़ी, तो वे महर्षि दधीचि की तरह अपनी ‘हड्डियाँ’ (सर्वस्व) भी पार्टी और युवाओं के भविष्य के लिए अर्पित करने को तैयार हैं। अवकाश का अर्थ निष्क्रियता नहीं है। वे लगातार लोगों के बीच जाकर उनसे परामर्श कर रहे हैं।

माना जा रहा है कि हरीश रावत ने एक साथ कई निशाने साधे हैं। एक ओर उन्होंने पार्टी आलाकमान के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है, तो दूसरी ओर ‘हड्डियाँ घिसने’ और ‘दधीचि’ वाले बयान से यह साफ कर दिया है कि 2027 की चुनावी बिसात में वे अभी भी सबसे सक्रिय और अपरिहार्य खिलाड़ी बने रहेंगे।


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