हरक ने हरीश पर साधा निशाना तो धामी ने किया सामूहिक इस्तीफे का आह्वान

हरक ने हरीश पर साधा निशाना तो धामी ने किया सामूहिक इस्तीफे का आह्वानउत्तराखंड कांग्रेस में संजय की एंट्री को लेकर अपनों के बीच जंग

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो, देहरादून। कांग्रेस में रामनगर के पूर्व ब्लाक प्रमुख संजय नेगी की एंट्री नहीं होने पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नाराजगी के बाद शुरू हुई महाभारत थमने का नाम नहीं ले रही है।हरीश रावत की ओर से 15 दिन की छुट्टी लेने की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद कांग्रेस हरीश समर्थक और उनके विरोधियों के बीच बंट गई है। कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के बयान पर पलटवार किया तो धारचूला विधायक हरीश धामी ने इसे हरीश रावत का अपमान करार दे डाला। उन्होंने हरीश रावत के आत्मसम्मान के लिए समर्थकों से सामूहिक इस्तीफे देने की बात कहकर हलचल मचा दी है। भाजपा को चुनौती देने में जुटी कांग्रेस में धड़ेबाजी चरम पर जा पहुंची है।

दरअसल, सारा विवाद रामनगर में कांग्रेस से निष्कासित पूर्व ब्लाक प्रमुख और वर्तमान में ज्येष्ठ प्रमुख संजय नेगी की घर वापसी को लेकर है।हरीश रावत अपने प्रिय संजय नेगी की हर हाल में पार्टी में वापसी चाहते हैं, लेकिन दिल्ली में प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी में हुई बैठक में हरीश के प्रस्ताव का अन्य नेताओं ने विरोध कर दिया। दरअसल, रामनगर में सक्रिय रणजीत रावत का संजय से छत्तीस का आंकड़ा है। रणजीत रामनगर से चुनाव लड़ना चाहते हैं और संजय का एंट्री का रणजीत और उनके खेमे के आला नेता विरोध करते रहे हैं। इस वजह से संजय की एंट्री नहीं हो सकी और हरीश रावत ने राजनीतिक कार्यक्रमों से 15 दिन की छुट्टी लेने की घोषणा की थी। हरीश के कदम के बाद पार्टी सीधा दो गुटों में बंट गई और एक दूसरे पर निशाना साधते हुए बयानबाजी शुरू हो गई।

हरीश खेमे के दिग्गज नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने बयान दिया कि रावत के बिना कांग्रेस की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस पर डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि किसी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि उसके बिना कांग्रेस नहीं जीत सकती है। किसी एक व्यक्ति के नहीं रहने से पार्टी खत्म नहीं होती है।

इधर, हरीश धामी ने फेसबुक पोस्ट लिखकर गुटबाजी को हवा दे दी है। उन्होंने साफ कहा कि हरक सिंह व्यक्ति हैं जिन्होंने 2016 में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का काम किया था। हाईकमान को धोखे का संज्ञान लेना चाहिए। हरीश रावत के समर्थक अपने नेता के आत्मसम्मान के लिए इस्तीफा दें। उनके इस बयान से तमाम सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब हाईकमान कांग्रेस की मजबूती के लिए तमाम बड़े लीडर्स को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। अब हरीश रावत की नाराजगी और गुटबाजी का चरम पार्टी के लिए कितना फायदा या नुकसान करता है, यह आने वाला वक्त बताएगा।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement