जर्जर छत का प्लास्टर गिरा, बाल-बाल बचे शिक्षक

अल्मोड़ा के जीआईसी लोधिया में बड़ा हादसा टला

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो

अल्मोड़ा। नगर से सटे राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) लोधिया में बुधवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। लंबे समय से जर्जर हो चुकी स्कूल की मुख्य बिल्डिंग स्थित स्टाफ रूम की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। गनीमत यह रही कि जिस कुर्सी पर प्लास्टर गिरा, उस पर बैठे शिक्षक महज कुछ सेकंड पहले ही खिड़की खोलने के लिए उठे थे, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई। इस घटना के बाद से स्कूल के अध्यापकों और छात्र-छात्राओं में दहशत का माहौल है।

जानकारी के मुताबिक, बुधवार को स्टाफ रूम में शिक्षक अपना कार्य निपटा रहे थे। इसी दौरान एक शिक्षक अपनी कुर्सी से उठकर खिड़की की तरफ गए। उनके हटते ही बारिश के कारण सीलन से जर्जर हो चुकी छत का भारी प्लास्टर सीधे उसी कुर्सी पर गिर गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से स्टाफ रूम में मौजूद सभी शिक्षक स्तब्ध रह गए।

घटना ने सरकारी स्कूलों के जर्जर ढांचे और उसमें जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर छात्रों व शिक्षकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय अभिभावकों ने स्कूली बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्कूल भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए और सुरक्षा के लिहाज से पढ़ाई के लिए तुरंत किसी वैकल्पिक स्थान पर अस्थायी शिफ्टिंग की व्यवस्था की जाए।

48 साल पुराना भवन, नए निर्माण की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

जीआईसी लोधिया के मुख्य भवन का निर्माण लगभग 48 वर्ष पूर्व हुआ था, जो अब पूरी तरह खंडहरनुमा स्थिति में पहुंच चुका है। वहीं दूसरी ओर, पिछले दो-तीन वर्षों के भीतर बने नए कमरों की हालत भी चिंताजनक है। नए भवनों की दीवारों और फर्श पर बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और बारिश में छतों से पानी टपकता है। अभिभावकों ने निर्माण कार्यों की घटिया गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग उठाई है।

डीएम के निरीक्षण के बाद ध्वस्तीकरण और नए भवन की आस

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने बीते दिवस ही स्कूल का स्थलीय निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया था कि मुख्य भवन पठन-पाठन और आवाजाही के लिए पूरी तरह असुरक्षित है। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को नियमों के तहत जर्जर ढांचे को ध्वस्त करने और नए भवन के निर्माण की कार्ययोजना (DPR) जल्द से जल्द तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं। डीएम की पहल के बाद अब ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।

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