
साल में 3 बार मिलेगा फल, किसान मेले में बिकने आए हैं पौधे
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो, पंतनगर। अब बागवानों और अमरूद के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। अब आपको अमरूद के स्वाद के लिए साल भर इंतजार नहीं करना होगा। कोलकाता की प्रसिद्ध ‘शबनम नर्सरी’ ने अमरूद की एक ऐसी थाई प्रजाति ‘गोल्डन-8’ विकसित की है, जो साल में एक या दो नहीं, बल्कि पूरे तीन बार फल देने की क्षमता रखती है। देश में पहली बार इस विदेशी प्रजाति के पौधे पंतनगर में चार दिवसीय किसान मेले में उपलब्ध कराए गए हैं।
मेले में आए नर्सरी के विशेषज्ञ और संचालक आयन मंडल के अनुसार, ‘गोल्डन-8′ मूल रूप से थाईलैंड की प्रजाति है। उन्होंने वहां से मदर प्लांट मंगाकर विशेष वैज्ञानिक पद्धति से इसे भारतीय जलवायु के अनुकूल तैयार किया है। यह किस्म 45 डिग्री सेल्सियस जैसे भीषण तापमान को भी सहन कर सकती है। इसकी खेती मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों की ढलानों तक आसानी से की जा सकती है, बशर्ते वहां जल भराव न हो।
औषधीय गुणों से भरपूर है फल
अयान ने दावा किया कि यह अमरूद न केवल स्वाद में शहद जैसा मीठा है, बल्कि इसमें फाइबर, मिनरल्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह पेट के रोगियों के लिए किसी रामबाण औषधि से कम नहीं है। सफेद अमरूद की प्रजातियों में यह सबसे मुलायम और नाम मात्र के बीजों वाला फल है, जिसका वजन 300 से 700 ग्राम तक पहुंच जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत ₹700 से ₹800 प्रति किलोग्राम तक है।
डेढ़ साल में मिलेगा 120 किलो फल
इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसकी फल देने की तकनीक है। अयान ने बताया कि किसान जिस महीने में फल लेना चाहता है, उससे ठीक तीन महीने पहले पौधों की छंटाई (प्रूनिंग) कर सकता है। शुरुआती 8 महीने में 25-30 किलो और डेढ़ साल बाद 100-120 किलो तक उत्पादन प्रति पौधा देता है।
विदेशी फलों का केंद्र बना शबनम नर्सरी स्टॉल
किसान मेले में केवल अमरूद ही नहीं, बल्कि शबनम नर्सरी के स्टॉल पर कई अन्य विदेशी किस्मों ने भी किसानों का ध्यान खींचा है। इनमें शामिल हैं। इनमें मैकेडेमिया नट्स (पहाड़ी बादाम की दुर्लभ प्रजाति), लोंगान(लीची की उन्नत विदेशी किस्म), केजी-10 ( 100 ग्राम वजन वाली जामुन की प्रजाति), आम की विदेशी किस्में शामिल हैं।


