हरदा की हुंकार: बूढ़ा हूँ, पर गलत देखूँगा तो खाँसूँगा ही

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संजय नेगी के बहाने विरोधियों को दिया कड़ा जवाब

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो, देहरादून। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने ‘अर्जित अवकाश’ से उपजे विवादों पर बड़ा बयान दिया हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हो रहे ट्रायल पर कहा कि वे राजनीति में ‘बोझ’ नहीं बनना चाहते, लेकिन चुप भी नहीं बैठेंगे।

संजय नेगी: ‘भावावेश’ नहीं, कांग्रेस का भविष्य हैं

कांग्रेस में उपजी स्थितियों में केंद्र पर रहे रामनगर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी का जिक्र करते हुए हरीश रावत ने उनके प्रति अपना समर्थन खुलकर जाहिर किया। कहा कि संजय नेगी जैसे ऊर्जावान नौजवानों को पार्टी से जोड़ना उनकी प्राथमिकता है। कहा कि संजय नेगी ने 2022 में परिस्थितियों के कारण भावावेश में चुनाव लड़ा था, लेकिन अब वे युवाओं को बड़ी संख्या में पार्टी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी को अगले 20-25 सालों के लिए नेतृत्व तैयार करना होगा। कहा कि अवकाश के दौरान वे संजय और उनके जैसे अन्य युवाओं को यही संदेश देना चाहते थे कि धैर्य रखो, मैं तुम्हारे लिए प्रयासरत हूँ।।

2027 का मोह त्यागा, अब बजाऊँगा ढोल

हरदा ने कहा कि वे 2027 का चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे खुद को समेटने को तैयार हैं ताकि पार्टी के अन्य ‘उत्साही’ नेताओं का योगदान प्रभावित न हो। उन्होंने कहा, मैं अब पार्टी का ढोल बजाकर विजय दिलाने के लिए काम करूँगा। यह मेरे लिए कांग्रेस को जिताने का अंतिम अवसर है।

अपनों के ट्रायल पर छलका दर्द

हरदा ने कहा कि उन्हें इस बात का कष्ट है कि पार्टी के लोग ही उनके अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने विरोधियों को नसीहत दी कि मोर्चे पर लड़ने वाला सिपाही हार जाए तो उसे गाली नहीं दी जाती। याद रखना, जब युद्ध का बाजा बजेगा, तो हरीश रावत फिर युद्धभूमि में दिखाई देगा। कहा कि यदि उन्हें संतान मोह होता, तो वे अपने बच्चों को सुरक्षित सीटों से लड़ाते, न कि उन सीटों से जहाँ कांग्रेस दशकों से हार रही है। मेरे दोस्तों को यह मान लेना चाहिए कि यह एक ऐसा बूढ़ा है, जो गलत होने पर खाँसेगा ही।


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