


– 55 से ज्यादा जवानों की शहादत का जिम्मेदार
– लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों को दे रहा था चकमा
– टाटा मैजिक से जाते समय दबोचा गया
रांची। नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षाबलों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए भाकपा (माओवादी) के एकमात्र जीवित पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। धनबाद और गिरिडीह सीमा पर स्थित मनियाडीह इलाके से उसे उसके दो सहयोगियों के साथ दबोचा गया। यह पूरी कार्रवाई केंद्रीय खुफिया एजेंसी, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के एक संयुक्त रणनीति और सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर की गई।
दरअसल, सुरक्षा एजेंसियों को गुप्त सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने दो सहयोगियों मेहनत उर्फ मोछू और गौरव उर्फ सौरभ के साथ एक टाटा मैजिक गाड़ी से गिरिडीह की ओर जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मुख्यालय ने जाल बिछाया और धनबाद-गिरिडीह बॉर्डर पर घेराबंदी कर तीनों को धर दबोचा। इसके अलावा दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मिसिर बेसरा झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड माना जाता था। उस पर 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें दो मामलों में एनआईए को भी उसकी तलाश थी। झारखंड सरकार ने उस पर 1 करोड़ और ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये (कुल 2.20 करोड़) का इनाम घोषित कर रखा था। साल 2003 और 2004 के दौरान हुए दो बड़े आईईडी धमाकों में उसकी सीधी भूमिका थी, जिसमें कम से कम 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।
मिसिर बेसरा पूरे देश में बचा हुआ आखिरी पोलित ब्यूरो मेंबर था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से पूर्वी भारत में नक्सलियों का नेटवर्क, फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और वसूली तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।
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2007 में हुआ था गिरफ्तार, 2009 में लखीसराय कोर्ट पर हमला कर भागे थे नक्सली
पीरटांड का रहने वाला मिसिर बेसरा पिछले 40 सालों से नक्सली संगठन में सक्रिय था। धनबाद में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान महाजनी आंदोलन से जुड़कर उसने माओवाद का रास्ता चुना था। सितंबर 2007 में पहली बार खूंटी जिले से पुलिस के हत्थे चढ़ा। 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर में नक्सलियों ने दुस्साहसिक हमला कर उसे छुड़ा लिया था। इसके बाद से वह बूढ़ा पहाड़, कोल्हान और सारंडा के जंगलों में छिपकर गतिविधियां चला रहा था। आईबी लगातार मिसिर बेसरा की मूवमेंट पर नजर रख रही थी। हाल ही में मई महीने में उसके दस्ते के 27 नक्सलियों ने और बीते मंगलवार को ही सारंडा में सक्रिय 24 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया था। सरेंडर करने वाले कैडर्स से मिली सटीक जानकारियों ने बेसरा की गिरफ्तारी में अहम कड़ी का काम किया।
देश से माओवादी पोलित ब्यूरो का पूरी तरह सफाया
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ ही माओवादियों का शीर्ष संगठन अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। 21 मई 2025 को सुरक्षा बलों ने नंबला केशव राजू उर्फ बसवा राजू को मार गिराया था। 22 फरवरी 2026 को भाकपा माओवादी प्रमुख देव ने सरेंडर कर दिया था। संगठन का पूर्व सचिव गणपति पिछले आठ सालों से लापता है और उसकी मौत की अटकलें लगाई जाती रही हैं। मिसिर बेसरा पूरे देश में बचा हुआ आखिरी पोलित ब्यूरो मेंबर था।

