– बाजपुर पहुंचे सीएम धामी, खेतों में उतरकर देखा नुकसान
– हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे मुख्यमंत्री, प्रभावित किसानों से की मुलाकात
– अधिकारियों को तत्काल सर्वे और समयबद्ध राहत के निर्देश
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो
बाजपुर। भीषण ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को हुए नुकसान की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रभावित किसानों के बीच पहुंच गए। हल्द्वानी से देहरादून लौटते समय ओलावृष्टि की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने खराब मौसम के बावजूद अपने हेलीकॉप्टर का रुख बाजपुर की ओर करा दिया। उन्होंने पहले प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और फिर खेतों में पहुंचकर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
शुक्रवार दोपहर बाजपुर क्षेत्र में अचानक भीषण ओलावृष्टि हुई। इससे खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा। इसी दौरान मुख्यमंत्री धामी हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही उन्होंने प्रभावित क्षेत्र की स्थिति जानने के लिए हेलीकॉप्टर बाजपुर की ओर ले जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण के जरिए प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। इसके बाद बाजपुर में उतरकर खेतों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर फसलों को हुए नुकसान और उनके सामने खड़ी समस्याओं की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का विस्तृत सर्वेक्षण कर नुकसान का आकलन प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि नुकसान के आकलन से लेकर राहत उपलब्ध कराने तक की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित किसानों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाए, ताकि उन्हें समय पर सहायता मिल सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है। किसानों के हितों की रक्षा करना और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए पूरी तत्परता से काम करने को कहा। ओलावृष्टि से हुए नुकसान के बाद अब प्रभावित किसानों की निगाहें सर्वेक्षण, मुआवजे और प्रशासन की ओर से होने वाली राहत कार्रवाई पर टिकी हैं।




