– बस स्टैंड वाली प्राचीन रामलीला का शुभारंभ, पहले दिन हुआ नारद मोह का भव्य मंचन
– महंत स्वामी नारायण चैतन्य महाराज ने किया उद्घाटन, राम नाम की महिमा का किया वर्णन
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो
रुद्रपुर। नगर की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी बस स्टैंड के सामने वाली श्रीरामलीला का भव्य शुभारंभ हुआ। मंदिर मनकामेश्वर कल्याण आश्रम, कल्याणी व्यू के महंत स्वामी नारायण चैतन्य महाराज ने फीता काटकर और भगवान श्रीराम की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला मंचन का उद्घाटन किया। पहले दिन कलाकारों ने नारद मोह की लीला का सजीव मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
शुभारंभ के बाद रामभजन प्रस्तुत किए गए। मुख्य अतिथि महंत स्वामी नारायण चैतन्य महाराज ने श्रद्धालुओं, कमेटी पदाधिकारियों और कलाकारों को संबोधित करते हुए राम नाम की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि प्रभु का नाम स्मरण करने मात्र से मनुष्य का कल्याण हो सकता है। इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी, श्री रामनाटक क्लब और श्री सनातन धर्म युवा मंच के पदाधिकारियों ने अतिथियों का फूलमालाओं, रामनाम के पटकों और शॉल से स्वागत किया।
प्रथम दिवस की लीला में दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय में कठोर तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या से चिंतित देवराज इंद्र ने कामदेव को उनकी साधना भंग करने के लिए भेजा, लेकिन कामदेव सफल नहीं हुए। इस पर नारद के मन में अपनी काम विजय का अहंकार उत्पन्न हो गया।
नारद अपनी विजय का वर्णन करने ब्रह्मा, भगवान शिव और श्रीहरि के पास पहुंचे। भगवान शिव ने उन्हें श्रीहरि के सामने इस प्रसंग का बखान न करने की सलाह दी, लेकिन नारद ने उनकी बात अनसुनी कर दी। भगवान विष्णु ने नारद का अहंकार दूर करने के लिए लीला रची। रास्ते में एक सुंदर नगर और राजकुमारी विश्वमोहिनी का स्वयंवर देखकर नारद मोहित हो गए। उन्होंने श्रीहरि से सुंदर रूप मांगा, लेकिन भगवान ने उन्हें वानर जैसा मुख दे दिया। स्वयंवर में विश्वमोहिनी ने श्रीहरि को वरमाला पहना दी। अपना चेहरा देखकर नारद क्रोधित हो गए और भगवान विष्णु को पत्नी वियोग सहने तथा वानरों की सहायता लेने का श्राप दे दिया। भगवान ने श्राप स्वीकार किया और अपनी माया हटा ली। इसके बाद नारद को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी। लीला ने दर्शकों को अहंकार त्यागने और प्रभु की महिमा पर विश्वास रखने का संदेश दिया।
रामलीला कमेटी ने किया स्वागत
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा ने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें मर्यादा, पारिवारिक संबंधों, भाईचारे, त्याग और कर्तव्य के ऐसे प्रसंग हैं, जो आज भी समाज को प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम का संयुक्त संचालन मंच सचिव विजय जग्गा और संदीप धीर ने किया। नारद की भूमिका मनोज मुंजाल, देवराज इंद्र की वैभव भुड्डी, कामदेव की हर्ष अरोरा, ब्रह्मा की सिद्धांत ग्रोवर, भगवान शिव की रवि चोपड़ा, भगवान विष्णु की मनोज अरोरा और विश्वमोहिनी एवं लक्ष्मी की भूमिका कनव गंभीर ने निभाई। अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न पात्रों के माध्यम से लीला को जीवंत बनाया।कार्यक्रम में श्रीरामलीला कमेटी, श्री रामनाटक क्लब और श्री सनातन धर्म युवा मंच के पदाधिकारी, सदस्य, कलाकार और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।




