– अभिनय और गीतों से शिक्षा को रोचक बनाने पर जोर
– आनंदा एकेडमी में सीसीआरटी की पांच दिवसीय कार्यशाला का दूसरा दिन
– शिक्षकों ने रंगमंच, लैंगिक समानता और हस्तकला के गुर सीखे
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो
हल्द्वानी। बच्चों को पढ़ाने के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर अभिनय, संवाद, संगीत और नाटकों के माध्यम से शिक्षा को अधिक रोचक और सहज बनाया जा सकता है। इससे बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है। यह बात प्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. डीएन भट्ट ने आनंदा एकेडमी में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन शिक्षकों को संबोधित करते हुए कही।
सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में ‘शिक्षा में सांस्कृतिक तत्व’ विषय के तहत शिक्षकों को रंगमंच, संस्कृति में लैंगिक भेदभाव और हस्तकला के शैक्षिक महत्व की जानकारी दी गई।
शिक्षा में रंगमंच विषय पर डॉ. डीएन भट्ट ने कहा कि रंगमंच एक प्रभावी शिक्षण पद्धति है। इसके माध्यम से बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय अभिनय, संवाद और नाटकों के जरिए सीखने का अवसर दिया जाता है। इससे उनकी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति और विषयों को समझने की क्षमता विकसित होती है।
‘संस्कृति में लिंगभेद’ विषय पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से जुड़ी दीपा बिष्ट ने बात रखी। कहा कि संस्कृति और लैंगिक भेदभाव का संबंध समाज में पुरुषों और महिलाओं के बीच मौजूद सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यवहारगत अंतर से जुड़ा है। इस विषय की समझ शिक्षकों को बच्चों में समानता और संवेदनशीलता की भावना विकसित करने में मदद कर सकती है।
प्रसिद्ध गायक डॉ. हरीश चंद्र जोशी ने शिक्षकों को भारतीय भाषाओं के गीतों का अभ्यास कराया। उन्होंने ओड़िया, हिंदी और कन्नड़ भाषा के गीतों के माध्यम से भारतीय संगीत और लोक परंपराओं की विविधता से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि भारत की विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों में गीतों की समृद्ध परंपरा है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। अंतिम सत्र में भास्कर भौर्याल और दिव्या पंत ने ‘हस्तकला’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हस्तकला के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं में रचनात्मकता, व्यावहारिक कौशल और सांस्कृतिक पहचान का विकास किया जा सकता है। हस्तनिर्मित वस्तुएं उपयोगी होने के साथ-साथ कलात्मक भी होती हैं और उनमें संबंधित क्षेत्र की संस्कृति एवं परंपराओं की झलक दिखाई देती है।
कार्यशाला में सीसीआरटी, नई दिल्ली से हरीश सिंह मनराल, धर्मेंद्र सिंह बसेड़ा, आनंद सिंह, त्रिलोक सिंह बृजवासी, नमिता पाठक, हेमंत पांडे, सुनीता बिष्ट, गिरीश चंद्र कांडपाल, पूजा बोरा, ललिता बोरा, अंजू डांगी, प्रेमा असवाल, रुचि पांडे, ममता जोशी पाठक, सुनीता रावत, गीता नेगी, पंकज लोहनी और नरेंद्र सिंह भाकुनी सहित विभिन्न शिक्षक मौजूद रहे।




