500 करोड़ के प्रोजेक्ट पर वर्चस्व की जंग

मेयर विकास शर्मा बोले – फाइलों में दबे काम को मैंने जिंदा किया

– विधायक का पलटवार- चिल्लाने से झूठ सच नहीं होता

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो 

रुद्रपुर। ​विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के रुद्रपुर संगठन में सब ठीक नहीं चल रहा है। ड्रेनेज प्लान के बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट के लिए बजट आवंटन होने के बाद से ही भाजपा के विधायक और मेयर के बीच श्रेय की जंग चल रही है। आलम ये रहा कि नगर निगम में हुए कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा के सामने ही विधायक शिव अरोरा और मेयर विकास शर्मा के बीच खूब जुबानी तीर चले। दोनों में इशारों एक दूसरे को खूब नसीहतें दी। इस घटनाक्रम से माहौल बेहद तनावपूर्व हो गया और खुद प्रभारी मंत्री भी असहज दिखे। इससे साफ हो गया है कि भीतर सुलग रही वर्चस्व की आग अब काबू से बाहर हो चुकी है।

मेयर विकास शर्मा बोले: फाइलों में दबे 300 करोड़ के प्रोजेक्ट को मैंने जिंदा किया

मेयर विकास शर्मा ने ड्रेनेज प्लान का पूरा क्रेडिट अपने खाते में डाल दिया। कहा जब मैं मेयर बना, तो 300 करोड़ का जो प्रोजेक्ट फाइलों में दबा धूल फांक रहा था, उसे मैंने और मेरी टीम ने पुनर्जीवित किया। 20 नालों के प्लान को 61 नालों में तब्दील करने का काम आपके मेयर ने किया है। कुछ लोग पत्रकारों को आगे करके जो हंसी-मजाक और ड्रामेबाजी का खेल खेल रहे हैं, जनता उसे बखूबी समझती है। काम पूरी टीम का है, किसी एक व्यक्ति विशेष को इसका सेहरा अपने सिर बांधने की गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए।

विधायक शिव अरोरा बोले: “मर्यादा में रहें, शराफत को लाचारी न समझें

विधायक शिव अरोरा मेंपलटवार करने उतरे विधायक ने सारी राजनीतिक शालीनता को दरकिनार करते हुए बेहद आक्रामक तेवर दिखाए। विधायक शिव अरोरा ने दोटूक शब्दों में चेताया कि ऊंची आवाज में चिल्लाने या मंच से शोर मचाने से झूठ सच नहीं हो जाता। रुद्रपुर का बच्चा-बच्चा जानता है कि ये ड्रेनेज प्लान कहां से पास हुआ और इसके लिए पैसा किसने मंजूर करवाया। यह मंच पुष्कर सिंह धामी सरकार की सामूहिक विकास योजनाओं का है, व्यक्तिगत श्रेय लूटने की दुकान नहीं। मेरी शराफत और शालीनता को मेरी कमजोरी समझने की भूल तो कतई मत करना।

 

सियासी मायने: निकाय चुनाव से पहले वर्चस्व की आर-पार की जंग

​एक ही पार्टी के दो बड़े चेहरों की यह सरेआम नूराकुश्ती महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे राजनीतिक हित जुड़े हैं। आगामी निकाय और विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनों गुट रुद्रपुर में अपनी एकतरफा हुकूमत कायम करना चाहते हैं। 500 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट पर जो अपना ठप्पा लगा देगा, जनता के बीच उसका पलड़ा भारी रहेगा। इसी साख को बचाने के लिए दोनों ने अपनी ही सरकार के मंच को अखाड़ा बना दिया। भाजपा जो खुद को ‘कैडर-बेस्ड’ और अनुशासित पार्टी कहती है, उसके दो कद्दावर नेताओं का इस तरह सरेआम एक-दूसरे को औकात और मर्यादा याद दिलाना संगठन की कमजोरी को उजागर करता है। हाईकमान के डर का खत्म होना साफ दिखाता है कि अंदरूनी गुटबाजी अब लाइलाज हो चुकी है।

विपक्ष के हाथ लगा ब्रह्मास्त्र

अब तक शहर के विकास को लेकर बैकफुट पर चल रहे विपक्ष को भाजपा ने खुद बैठे-बिठाए सबसे बड़ा हथियार दे दिया है। जब मेयर खुद कह रहे हैं कि चार साल का काम एक साल में कैसे हुआ, तो विपक्ष को सरकार की विफलता पर सवाल उठाने का खुला मौका मिल गया है।

​रुद्रपुर के इस सियासी दंगल ने यह तय कर दिया है कि आने वाले दिनों में भाजपा के भीतर की यह गुटबाजी और हिंसक रूप लेगी, जिसका सीधा असर जिले की पूरी राजनीति पर पड़ना तय है।

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