– ओलावृष्टि से धान की फसल तबाह, डीएम से वार्ता के बाद एसडीएम के साथ प्रभावित खेतों में पहुंचे महापौर
– नुकसान का जल्द सर्वे कराने की मांग, मुख्यमंत्री धामी के सामने रखेंगे आपदा की पूरी स्थिति
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो
रुद्रपुर। शुक्रवार को हुई भीषण ओलावृष्टि और तेज बारिश से रुद्रपुर समेत गदरपुर और बाजपुर विधानसभा क्षेत्रों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कटाई की तैयारी कर रहे किसानों की महीनों की मेहनत पर मौसम की मार पड़ी है। कई खेतों में फसल इस कदर प्रभावित हुई है कि खड़ी धान की फसल कटी हुई नजर आ रही है। ओलावृष्टि के करीब पांच घंटे बाद भी कुछ स्थानों पर खेतों में बर्फ जमी दिखाई दी।
प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए महापौर विकास शर्मा ने पहल की है। उन्होंने जिलाधिकारी नितिन भदौरिया से वार्ता कर फसलों को हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराने और किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने का आग्रह किया। इसके बाद महापौर एसडीएम अमृता शर्मा और किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजेश बजाज के साथ प्रभावित खेतों में पहुंचे। उन्होंने फसलों की स्थिति का जायजा लेकर किसानों से नुकसान की जानकारी ली।
नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाने की मांग
महापौर विकास शर्मा ने कहा कि किसान धान की फसल पकने के बाद कटाई की तैयारी कर रहे थे। ऐसे समय में हुई ओलावृष्टि ने उनकी मेहनत और आर्थिक उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। फसल बर्बाद होने से खेती पर निर्भर परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए नुकसान का वास्तविक आकलन कर प्रभावित किसानों को जल्द राहत देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी से प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र सर्वे कराने की मांग की गई है। प्रशासन की ओर से जल्द नुकसान का आकलन कराने की बात कही गई है। महापौर ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या शासन-प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से उठाई जाएगी और राहत प्रक्रिया में देरी न हो, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे आपदा की स्थिति
महापौर ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने ओलावृष्टि से हुए नुकसान की पूरी स्थिति रखी जाएगी। प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने के साथ ही क्षेत्र के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा कराने का भी प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जल्द कार्रवाई जरूरी है। उनका प्रयास रहेगा कि फसलों के नुकसान का सही आकलन हो और प्रभावित किसानों को समय पर सहायता मिले, ताकि उन्हें आर्थिक संकट के बीच अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।




