आइसा नेताओं की रिहाई की मांग

– उत्तराखंड में पुलिसिया दमन के खिलाफ फूटा गुस्सा

– भाकपा माले नेता कामरेड इंद्रेश मैखुरी ने जारी किया वीडियो

न्यूज एंड नॉक संवाददाता

लालकुआं। पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। इस बीच उत्तराखंड से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पुलिस द्वारा आइसा के छात्र नेताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद आक्रोश फैल गया है।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को भंग करने की मांग को लेकर छात्रों का आमरण अनशन आज 22वें दिन भी जारी रहा। तीन छात्र साथी पिछले 22 दिनों से लगातार अनशन पर बैठे हैं, जिनके समर्थन में बीते दिनों दिल्ली में एक बड़े मार्च का आह्वान किया गया था।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारें नौजवानों और छात्रों को इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने से रोकने के लिए हर संभव हथकंडे अपना रही हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड के लालकुआं में पुलिस ने दमनकारी रुख अपनाते हुए आइसा के प्रमुख साथी कॉमरेड धीरज कुमार और उनके तीन अन्य साथियों को हिरासत में ले लिया है।

भाकपा माले नेता इंद्रेश मैखुरी ने वीडियो जारी कर कहा कि   पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए साथियों को कहां रखा गया है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। पुलिस के उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिशें भी लगातार नाकाम हो रही हैं, जिसे लेकर छात्रों में गहरा रोष है। छात्रों और नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली नीतियां और उनके खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने की कोशिशों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में जा रहे युवाओं के साथ अपराधियों जैसा सलूक करना बंद करे।

उन्होंने मोदी सरकार और राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि कॉमरेड धीरज कुमार और उनके साथियों को तुरंत रिहाई दी जाए। यदि पुलिस ने इस तरह का तानाशाही और दमनकारी रवैया बंद नहीं किया, तो सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। युवाओं का कहना है कि सरकार के इन दमन चक्रों से नौजवानों का आक्रोश थमने वाला नहीं है।

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