जानिए, कैसे दो नेपाली मरीजों को दिया मेडिसिटी अस्पताल ने जीवनदान

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स्वस्थ हुआ नेपाल का मरीज

गंभीर हार्ट अटैक के चलते लाए गए थे अस्पताल, हार्ट की तीनों धमनियों में थी रूकावट
जटिल रोटा गाइडेड पीटीसीए तकनीक का किया गया इस्तेमाल

न्यूज एंड नाॅक ब्यूरो, रूद्रपुर। आज के दौर में गंभीर बीमारियों का दायरा बढ़ रहा है तो चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों के प्रयोग से मरीजों का जीवन बच रहा है। ऐसे ही नई तकनीक का इस्तेमाल कर द मेडिसिटी अस्पताल ने नेपाल से लाए गए गंभीर हार्ट अटैक के दो मरीजों को जीवनदान दिया है। अस्पताल के कार्डियोलाॅजी विभाग ने जटिल रोटा गाइडेट पीटीसीए तकनीक प्रक्रिया से मरीजों की जान बचाई और उन्हें स्वस्थ कर घर भेजा।

कंचनपुर नेपाल के रहने वाले खागेन्द्र ओड को सीने में तेज दर्द और मतली की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था। वह पहले से ही मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रसित थे। अस्पताल में हुई जांच में उनको गंभीर हार्ट अटैक आने की पुष्टि हुई थी। उनके हृदय की कार्यक्षमता गिरकर मात्र 35 से 40 प्रतिशत रह गई थी। एंजियोग्राफी रिपोर्ट में हृदय की तीनों धमनियों में रुकावट की पुष्टि हुइ थी। उनकी धमनियों में अत्यधिक कैल्शियम जमा होने के कारण साधारण एंजियोप्लास्टी संभव नहीं थी। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ अभिषेक सकवारिया और उनकी टीम ने आधुनिक रोआ गाइडेड पीटीसीए तकनीक उपयोग करने का निर्णय लिया था। डाॅ अभिषेक सकवारिया ने बताया कि मरीज की धमनियों में ब्लाॅकेज बहुत सख्त था। हमने रोटाबलेशन के जरिए हीरे की परत वाले छोटे बुर का उपयोग करके सख्त ब्लाॅकेज को साफ किया। इसके बाद एलएडी धमनी में सीन्स क्सपेडिशन स्टेंट सफलतापूर्वक लगाया गया। इस प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

इसी तरह का दूसरा मरीज हरि चंद को उच्च रक्तचाप की समस्या थी। वे बाएं सीने में दर्द घबराहट और पसीने की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती हुए थे। एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों धमनियों में रुकावट आई थी। इसके बाद
मरीज का रोटाबलेशन के साथ पीटीसीए किया गया। इसके बाद एलएडी में एक स्टेंट और आरसीए में तीन स्टेंट लगाए गए। डाॅ अभिषेक ने बताया कि रोटाबलेशन पीटीसीए तकनीक उन रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है जिनके लिए ओपन हार्ट सर्जरी जोखिम भरा हो सकता है। इससे बेहतर स्टेंट प्लेसमेंट और रिकवरी का समय कम होता है।

इस तकनीक के के प्रमुख फायदे-
सख्त ब्लॉकेज का इलाज – यह प्रक्रिया उन धमनियों को खोलने में प्रभावी है जहाँ पारंपरिक बैलून एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग काम नहीं करते हैं। खासकर जब ब्लॉकेज बहुत सख्त हो ।
बेहतर स्टेंट प्लेसमेंट – पट्टिका को पीसकर छोटे कणों में बदलने से धमनी के अंदर की सतह चिकनी हो जाती है। इससे स्टेंट को सही जगह पर लगाना और फैलाना आसान हो जाता है। इससे रुकावट फिर से होने (रेस्टेनोसिस) का जोखिम कम हो जाता है ।
रक्त प्रवाह में सुधार – धमनी को प्रभावी ढंग से खोलने से हृदय में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। जिससे सीने में दर्द (एनजाइना) जैसे लक्षण कम होते हैं और हृदय का कार्य बेहतर होता है।
न्यूनतम इनवेसिव – यह बाईपास सर्जरी की तुलना में कम चीर.फाड़ वाली प्रक्रिया हैए जिससे रिकवरी का समय कम होता है दर्द कम होता है और जटिलताओं का जोखिम भी कम होता है।
उच्च सफलता दर– अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा किए जाने पर रोटाब्लेशन की सफलता दर 95 प्रतिशत से अधिक होती है, जो जटिल मामलों में प्रक्रिया की सफलता को काफी बढ़ा देती है।
टारगेटेड ट्रीटमेंट– यह डिफरेंशियल कटिंग तकनीक का उपयोग करता है। इसका र्थ है कि हीरे की कोटिंग वाली बर्र केवल कठोर कैल्शियम युक्त ऊतक को काटती है जबकि धमनी के स्वस्थ और लचीले ऊतक को काफी हद तक सुरक्षित रखती है।


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