दहेज हत्या के मामले में पति को सात साल का कठोर कारावास

Share News

अदालत ने सास-ससुर समेत तीन अभियुक्तों को किया बरी

न्यूज एंड नॉक डेस्क

रुद्रपुर। सवा सात साल पहले सितारगंज में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई विवाहिता नेहा की मौत के मामले में अदालत में बड़ा फैसला सुनाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने मृतका के पति हीरा लाल को दोषी करार देते हुए सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में मामले में नामजद सास, ससुर और ननद को बरी कर दिया है।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) लक्ष्मी नारायण पटवा के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गोंडा निवासी अमृत पाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी बहन नेहा की शादी 14 मई 2017 को सितारगंज के चूना भट्टी निवासी हीरा लाल के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति हीरा लाल, सास सोमवती, ससुर महेंद्र और ननद कंचन व आरती नेहा को कम दहेज लाने के लिए ताने देते थे और उसका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न करते थे। परिवार की गरिमा की खातिर नेहा हर जुल्म सहती रही।

दो फरवरी 2019 को नेहा ने एक बच्ची को जन्म दिया। लड़की पैदा होने और दहेज की मांग को लेकर ससुराल वालों ने प्रसव के तुरंत बाद ही नेहा को बेरहमी से पीटा और घर से बाहर निकाल दिया। तड़पती हुई हालत में एक स्थानीय महिला ने इंसानियत दिखाते हुए नेहा को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। लेकिन गंभीर चोटों और प्रताड़ना के कारण तीन फरवरी 2019 को नेहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में मृतका के पति सहित चार ससुरालियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।

इस मुकदमे की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी लक्ष्मी नारायण पटवा ने अदालत के सामने 18 गवाह पेश किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और गवाहों के बयानों को बारीकी से सुनने के बाद यह माना कि प्रसव के दौरान की गई मारपीट ही मौत की मुख्य वजह बनी।अदालत ने दोषी पति हीरा लाल को सात वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सास, ससुर और ननद को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।


Share News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *