– 19 गवाहों के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
– ग्राम प्रीतनगर में दो भाइयों गुरपेज और गुरकीरत की हुई थी हत्या
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो
रुद्रपुर। जमीनी विवाद को लेकर दिनदहाड़े हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्या की अदालत ने मुख्य अभियुक्त राकेश मिश्रा उर्फ पप्पू मिश्रा निवासी प्रीतनगर रुद्रपुर और हाल निवासी कल्याणी व्यू, आवास विकास, रुद्रपुर को हत्या और अवैध असलहा रखने के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हत्यारे पर 11 हजार रूपये का जुर्माना लगाया गया है। यह मामला वर्ष 2021 में दो सगे भाइयों की हत्या के बाद जिले में बेहद चर्चित रहा था।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) लक्ष्मी नारायण पटवा ने पैरवी की। अभियोजन ने अपने कथानक को सिद्ध करने के लिए न्यायालय में 19 गवाहों को परीक्षित कराया। गवाहों के बयान, पुलिस की विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी माना।
दरअसल, 15 जून 2021 को थाना रुद्रपुर क्षेत्र के ग्राम प्रीतनगर में जमीनी विवाद को लेकर राकेश मिश्रा उर्फ पप्पू मिश्रा ने अपने सहयोगियों के साथ पड़ोसी काश्तकार के दो बेटों गुरपेज सिंह और गुरकीर्तन सिंह पर लाइसेंसी राइफल से फायरिंग कर दी थी। गोली लगने से दोनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। मृतकों के पिता की तहरीर पर थाना रुद्रपुर में धारा 302, 504 और 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना में प्रयुक्त 315 बोर राइफल और कारतूस की बरामदगी के संबंध में आयुध अधिनियम के तहत भी अभियोग दर्ज किया गया।
अदालत ने धारा 302 आईपीसी के तहत अभियुक्त राकेश मिश्रा को कठोर आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 27(1) आयुध अधिनियम के तहत अभियुक्त को तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि का नियमानुसार समायोजन किया जाएगा।
19 गवाहों की गवाही से मजबूत हुआ अभियोजन पक्ष
अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी लक्ष्मी नारायण पटवा ने मामले में प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष अभियोजन के गवाहों और साक्ष्यों को प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से कुल 19 गवाहों को परीक्षित कराया गया। अदालत के फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस चर्चित डबल मर्डर केस में पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद को बल मिला है।




