नियम पर रसूख भारी: 20 साल से जमे जेई ट्रांसफर के बाद भी रिलीव नहीं

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– पंचायतीराज निदेशक निधि यादव ने जारी किया कड़ा पत्र – कार्यमुक्त न करने वाले एएमए पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो

रुद्रपुर। जिला पंचायत ऊधमसिंहनगर में सरकारी नियमों पर एक बार फिर रसूख भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। पिछले 20 वर्षों से भी अधिक समय से एक ही जगह पर अपनी जड़ें जमाए बैठे और वर्तमान में प्रभारी अभियंता की कुर्सी संभाल रहे कनिष्ठ अभियंता मोहन सिंह बिष्ट के ट्रांसफर को लेकर महकमे में जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। पूरे सेवाकाल में पहली बार जिले से बाहर बागेश्वर तबादला होने के बाद अब उसे रुकवाने के लिए पर्दे के पीछे से खेल चल रहा है। इस बीच, इस पूरे मामले और प्रदेश भर में तबादला आदेशों की अवहेलना को देखते हुए निदेशालय पंचायतीराज ने एक बेहद कड़ा और नया आदेश जारी कर हड़कंप मचा दिया है।

दरअसल, 06 जून को जारी आदेश के मुताबिक मोहन सिंह बिष्ट को उनके मूल पद (कनिष्ठ अभियंता) पर जिला पंचायत बागेश्वर भेजा गया था। आदेश में साफ लिखा था कि यह ‘तत्काल प्रभावी’ होगा। लेकिन ‘तत्काल’ तो छोड़िए, रसूख ऐसा कि हफ्तों बीत जाने के बाद भी उन्हें ऊधमसिंहनगर से एकतरफा रिलीव तक नहीं किया गया।

जानकारों की मानें तो जिला पंचायत ऊधमसिंहनगर में वर्तमान में अभियंता के रूप में जफर अंसारी तैनात हैं, लेकिन निर्माण कार्यों से लेकर तमाम बड़े प्रोजेक्ट्स पर सीधा दखल मोहन सिंह बिष्ट का ही रहता आया है। यही वजह है कि ट्रांसफर ऑर्डर आते ही उनके करीबी ठेकेदारों का एक मजबूत ‘सिंडिकेट’ सक्रिय हो गया। चर्चाएं आम हैं कि यह ठेकेदार लॉबी और कुछ नेता साहब का तबादला रुकवाने के लिए देहरादून (मुख्यालय) में एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।

अब। पंचायतीराज निदेशक निधि यादव ने दिनांक 02 जुलाई 2026 को प्रदेश के अपर मुख्य अधिकारियों को अल्टीमेटम जारी किया है। निदेशक ने सख्त लहजे में कहा है कि स्थानांतरण सत्र 2026-27 के तहत 06 जून 2026 को पात्र कार्मिकों का तबादला किया गया था, लेकिन संज्ञान में आया है कि कतिपय कार्मिकों द्वारा नवीन तैनाती स्थल पर आज तक ज्वाइन नहीं किया गया है। सभी जनपदों के एएमए दो जुलाई स्थानांतरित कार्मिकों के कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र, योगदान आख्या और प्रभार प्रमाण पत्र निदेशालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि स्थानांतरित कार्मिकों ने नई जगह ज्वाइन नहीं किया है, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भेजी जाएगी।

यदि किसी अपर मुख्य अधिकारी द्वारा स्थानांतरित कार्मिक को जबरन रोके रखा गया और कार्यमुक्त नहीं किया गया, तो संबंधित एएमए के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन को कर दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।

एक तरफ जहां चहेती लॉबी ट्रांसफर रुकवाने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक जुगाड़ बिठाने में व्यस्त थी, वहीं दूसरी तरफ 2 जुलाई 2026 को जारी निदेशक निधि यादव के इस नए और कड़े आदेश ने सिंडिकेट के पसीने छुड़ा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि ऊधमसिंहनगर जिला पंचायत प्रशासन इस ‘महा-आदेश’ के बाद भी रसूखदार जेई को संरक्षण देता है या फिर उन्हें तत्काल प्रभाव से बागेश्वर के लिए एकतरफा रिलीव किया जाता है।

 

 


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