दहेज हत्या मामले में दोषी पति को उम्रकैद

– सात लाख रुपये दहेज न मिलने पर ली थी पत्नी की जान  – तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो

रुद्रपुर। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चन्द्र आर्य की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में आरोपी पति शिशुपाल को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 304-ख (दहेज मृत्यु) के तहत कठोर आजीवन कारावास और धारा 4 (दहेज प्रतिषेध अधिनियम) के तहत 2 वर्ष के कठोर कारावास के साथ कुल 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

जानकारी के अनुसार, पीलीभीत ने न्यूरिया थाना क्षेत्र निवासी मृतका रिकी का विवाह वर्ष 2018 में ग्राम कमुआ, थाना हाफिजगंज (बरेली, यूपी) निवासी शिशुपाल के साथ हुआ था। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा कार खरीदने और व्यापार के नाम पर 7 लाख रुपये दहेज की मांग की जा रही थी। मांग पूरी न होने पर मृतका को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। मामला पुलिस में गया था और दोनों पक्षों में समझौता हो गया था।

इसके बाद शिशुपाल अपनी पत्नी रिकी और 13 साल के बेटे अरनब को लेकर वार्ड नंबर चार आजादनगर, ट्रांजिट कैंप में आकर रहने लगा था। यहां भी रिकी के साथ मारपीट की जाती थी

शिकायतकर्ता मृतका के पिता राम बिलाश निवासी ग्राम जटपुरा, थाना न्यूरिया, पीलीभीत द्वारा ट्रांजिट कैंप थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी शिशुपाल ने मृतका के साथ मारपीट की और उसे आजाद नगर, ट्रांजिट कैंप (रुद्रपुर) स्थित किराये के कमरे में ले आया। 06/07 अक्टूबर 2022 की रात आरोपी ने दहेज की खातिर अपनी पत्नी की निर्मम हत्या कर दी।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त शिशुपाल को दोषी पाया। अदालत ने धारा 304-ख IPC के तहत दोषी को कठोर आजीवन कारावास, धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास और 5,000 जुर्माना (जुर्माना न देने पर 3 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास) लगाया है।

अदालत ने अभियुक्त को IPC की धारा 302 और धारा 3 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया।

 

 

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