रिश्वत लेते दो कर्मियों को पड़कने वाली विजिलेंस टीम को बनाया बंधक, पुलिस नहीं छुड़ा पाई 

सितारगंज तहसील में हाईवोल्टेज ड्रामा, तहसील के कमरे में बंद हैं टीम और पकड़े गए बाबू-अमीन

– बाहर मौजूद हैं जिले भर के तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मी

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो

सितारगंज। तहसील में करप्शन के खिलाफ विजिलेंस की टीम ने ऐसी रेड मारी कि खुद शिकारी ही फंसते-फंसते बचे और उन्हें तहसील परिसर में ही घंटों तक बंधक बनना पड़ गया। मामला जमीन कुर्क करने का आदेश रुकवाने और केसीसी लोन की आरसी खत्म करने के एवज में 14 हजार रुपये की रिश्वत वसूलने का है। आलम ये है कि रात भर बंधक होने के बावजूद सुबह पांच बजे तक भी 10 सदस्यीय टीम को पुलिस बाहर नहीं निकाल पाई है।

शिकायतकर्ता अवतार सिंह से संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा और वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा ने मिलकर खेल सेट किया था। मदन लाल ने 10 हजार और भूपेंद्र ने 6 हजार यानी कुल 16 हजार मांगे थे, जो बाद में 14 हजार में तय हुए। विजिलेंस ने जाल बिछाया और दोनों को रंगेहाथों दबोच लिया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होते ही महकमे में भूचाल आ गया।

अपने साथियों के पकड़े जाने से गुस्साए तहसील कर्मियों ने तुरंत मोर्चा खोल दिया। लेखपाल और संग्रह अमीन संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और विजिलेंस टीम को कमरे से बाहर नहीं निकलने दिया। देखते ही देखते तहसील परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया और तीखी नोकझोंक के बीच भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

कर्मचारियों और यहाँ तक कि तहसीलदार हिमांशु जोशी ने भी इस ट्रैप कार्रवाई को सिरे से खारिज कर दिया। उनका तर्क था कि पकड़ी गई रकम कोई रिश्वत की नहीं, बल्कि राजकीय राजस्व और केसीसी ऋण की वैध वसूली की थी, जिसे जबरन रिश्वत का रंग देकर कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। वहीं, विजिलेंस टीम के प्रभारी प्रभात कुमार ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई पूरी तरह से साक्ष्यों के आधार पर और विधिक प्रक्रिया के तहत की गई है। यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

इस पूरे मामले में राजस्व विभाग और विजिलेंस विभाग आमने सामने आ गए हैं। ये मामला पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद अब तक टीम कमरे में ही है।

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