


– टायर फटने से कार में लग गई थी आग, क्लेम देने में आनाकानी कर रही थी इंश्योरेंस कंपनी
– अदालत का आदेश: 2.09 लाख रुपये हर्जाने के साथ देना होगा 6 फीसदी ब्याज
– मानसिक उत्पीड़न के लिए 3 हजार और अदालती खर्च के लिए देने होंगे 2 हजार रुपये
न्यूज एंड नॉक ब्यूरो
रुद्रपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्लेम देने में आनाकानी करने पर दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को पीड़िता को तत्काल 2.09 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। इसके साथ ही बीमा कंपनी को ब्याज और मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना भी भुगतना होगा।
पद्तपुर देवलिया, जयपुर वीसा, लालकुआं, नैनीताल की रहने वाली शांति देवी ने स्वरोजगार के तहत एक वाहन UK 04 TA 5800) खरीदा था। इस वाहन का 20 फरवरी 2019 से 19 फरवरी 2020 तक दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से वैध बीमा था। 22 फरवरी 2019 को सितारगंज से किच्छा जाते समय अचानक गाड़ी का टायर फट गया और कार में भीषण आग लग गई। पीड़िता ने जब नियमानुसार बीमा कंपनी से अपनी क्षतिपूर्ति का दावा किया, तो कंपनी ने उनकी एक न सुनी और चक्कर कटवाती रही। आखिरकार थक-हारकर पीड़िता को उपभोक्ता फोरम की शरण लेनी पड़ी।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चंद्र चंदोला और डॉ. मनीला की पीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। फोरम ने माना कि वैध बीमा होने के बावजूद क्लेम न देना सेवा में घोर लापरवाही है। उपभोक्ता फोरम ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़िता को 2,09,000 रुपयों की मुख्य क्लेम राशि तत्काल 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। मानसिक उत्पीड़न और परेशानी के एवज में 3,000 रुपये का अतिरिक्त हर्जाना दे। अदालती वाद व्यय (कोर्ट खर्च) के रूप में 2,000 रूपये का भुगतान करे।

