


पुलिस पर अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप, कोतवाली में जोरदार आक्रोश
अवैध हिरासत के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई मंगलवार को होगी
न्यूज एंड नॉक संवाददाता
रामनगर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के विरोध में शनिवार को रामनगर कोतवाली में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कोतवाली का घेराव कर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सोमवार को प्रभात ध्यानी ने रिहाई के बाद पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि 19 जुलाई की शाम पांच बजे वह ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे थे। इसी दौरान ऋषिकेश कोतवाली के एसएसआई नवीन जोशी ने जीआरपी के सिपाहियों की मदद से उन्हें जबरन ट्रेन से नीचे उतार दिया। पुलिस ने उनका सामान और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया। जब मैंने पुलिस से हिरासत में लेने की वजह पूछी, तो उन्होंने कहा कि नैनीताल पुलिस से इनपुट मिला है कि आपको किसी भी कीमत पर जंतर-मंतर जाने से रोकना है। इसके बाद मुझे रातभर रामनगर कोतवाली में पुलिस हिरासत में रखा गया और परिजनों तक को सही सूचना नहीं दी गई, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। उनको 20 जुलाई की दोपहर 2 बजे रिहा किया गया।
उनकी इस अवैध हिरासत के खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले में न्यायालय में अगली सुनवाई मंगलवार को होनी तय हुई है।
हिरासत से मुक्त होने के बाद ध्यानी के समर्थन में उतरे विभिन्न संगठनों ने शहर में एक विशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की मोदी सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को तत्काल वापस लिया जाए और शिक्षा का निजीकरण बंद हो।
इस प्रदर्शन में समाजवादी लोकमंच के मनीष कुमार व जगमोहन सिंह, व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, देवभूमि व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनिंदर सिंह सेठी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की कौशल्या व सरस्वती, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंबाल, आइसा नेता सुमित कुमार, राज्य आंदोलनकारी पुष्कर दुर्गापाल, वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश नैनवाल व प्रकाश बिष्ट सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

