अलविदा जनरल साहब: राजनीति में ईमानदारी और सादगी की मिसाल थे भुवन चंद्र खंडूड़ी

Share News

शोक में डूबा उत्तराखंड, पीएम मोदी, सीएम धामी सहित मंत्रियों और विभिन्न दलों के नेताओं ने जताया दुख

न्यूज एंड नॉक ब्यूरो 

देहरादून। राजनीति में जब भी ईमानदारी, बेदाग छवि और कड़क अनुशासन की बात होगी, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी का नाम हमेशा अग्रिम पंक्ति में लिया जाएगा। मंगलवार को देहरादून के अस्पताल में उन्होंने लंबी बीमारी से जूझते हुए अंतिम सांस ली। उनके जाने से न केवल उत्तराखंड ने अपना एक दूरदर्शी नेता खोया है, बल्कि देश ने मूल्य आधारित राजनीति का एक मजबूत स्तंभ खो दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि खंडूड़ी जी का योगदान उत्तराखंड के विकास और साफ-सुथरी राजनीति के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद भी खंडूड़ी जी का रहन-सहन एक सामान्य फौजी अधिकारी जैसा ही सादा था। वे दिखावे और फिजूलखर्ची से कोसों दूर रहते थे। समय की पाबंदी को लेकर वे इतने सख्त थे कि यदि कोई अधिकारी या नेता बैठक में थोड़ा भी लेट होता, तो वे मंच से ही अपनी नाराजगी जाहिर कर देते थे।

अटल बिहारी बाजपेई के कार्यकाल में जब देश में बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा था, तब सड़क परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी खंडूड़ी जी के पास थी। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ों से लेकर देश के कोने-कोने तक सड़कों का जाल बिछाने में उनकी कार्यशैली का बड़ा योगदान रहा। उत्तराखंड के लोग अक्सर गर्व से कहते थे कि खंडूड़ी जहां जाते थे, वहां सड़क पहुंच जाती थी।

 

2007 से 2009 और फिर 2011 से 2012 तक दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे खंडूड़ी फाइलों में देरी और भ्रष्टाचार से सख्त नफरत करते थे। उनका एक मशहूर कथन आज भी याद किया जाता है कि सरकारी कुर्सी आराम के लिए नहीं, जिम्मेदारी के लिए होती है। उन्होंने राज्य में ट्रांसफर-पोस्टिंग के धंधे पर नकेल कसी और हमेशा साफ-सुथरी राजनीति का समर्थन किया। हालांकि, यही सख्ती कभी-कभी उनकी पार्टी के भीतर असंतोष की वजह भी बनी थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

उत्तराखंड की जनता के बीच अक्सर यह चर्चा होती थी कि अगर व्यवस्था में खंडूड़ी जैसे दो-चार नेता और होते, तो राज्य की तस्वीर कुछ और होती। पिछले कुछ वर्षों से वे अस्वस्थ चल रहे थे और 2025 में उनकी ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। उम्र के इस पड़ाव पर वे सक्रिय राजनीति से भले दूर थे, लेकिन उनका मार्गदर्शन हमेशा राज्य के नेताओं को मिलता रहा।


Share News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *